तुम्हें कौन चाहेगा
तुम्हें कौन चाहेगा
बहुत चाहने वाले है तुम्हारे,
मगर तुमको हमसा कौन चाहेगा।।
कोई है क्या जो तुम्हारे एक मुस्कराहट के लिए,
मेरी तरह अपनी हर एक साँस लगा दे।।
कोई है क्या जो बंद आंखों से भी ,
तुम्हारे एहसास से तुमको पहचान लें।।
कोई है क्या जो रोकर मेरी तरह,
पूरी रात तुम्हारे इंतजार में गुजार दें।।
बहुत चाहने वाले है तुम्हारे,
मगर तुमको हमसा कौन चाहेगा।।
कोई है क्या जो तुमसे तुम्हारी खातिर ,
तुम्हीं से झगड़ा कर तुम्ही को मनाए।।
कोई है क्या जो मेरी तरह तुमको चाहकर,
खुद को खुद से मिटा बस तुमपर वार दे।।
बहुत चाहने वाले है तुम्हारे,
मगर तुमको हमसा कौन चाहेगा।।
"गुजरेगी कभी रात मेरी तो बताएंगे,
बस तुमको गहरा एक राज सुनाएंगे।।
बीती शामें जो, चाँद शाहिद है जिसका ,
वो ज़ह्मत बाकी है अब भी वो बताएंगे।।"
तुमको चाहने वाले बहुत है,
तुमको मगर हमसा कौन चाहेगा।।
