STORYMIRROR

Maitri Kiran Nikshita

Romance

3  

Maitri Kiran Nikshita

Romance

तुम्हारा दर्द

तुम्हारा दर्द

1 min
221

तुम्हारे दर्द

के आभास ने हमें बना दिया हमदर्द,

अपना सब कुछ भुला के,

अब करना चाहते हैं तुम्हारी मदद।

इतनी प्यारी हंसी के पीछे,

इतना दुख कैसे छुपा लेती हो तुम

तुम्हे जानने के बाद ताजुब हो गए हैं हम।

चलो अब थाम लो मेरा हाथ,

चल पड़ो फिर रौशनी के तरफ,

और पहचान लो खुद के सारे शरफ।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance