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Ksv Njha

Romance

3  

Ksv Njha

Romance

तुम -मैं

तुम -मैं

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201

कुछ अलग सी नहीं आरजू मेरी

तूँ मृग हो चंचल और मैं कस्तूरी


मैं तुझमें ढ़लूँ आफ़ताब की तरह

जो समेट ले तूँ कुछ रात की तरह


मैं हो जाऊं तुझसा पा लूं तुझको

कुछ मैं सा कुछ आप की तरह 


फिक्र न कर, ठहर जा जरा

आया हूं मैं वस्ल ए रात की तरह।


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