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Plaban Choudhury

Romance

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Plaban Choudhury

Romance

तुम ही हो

तुम ही हो

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तुम ही अंधेरे में राह दिखाने वाली चाँद हो मेरी,

तुम ही आन, मान, सम्मान हो मेरी।।

तुम मेरी अलबेली हो,

तुम मेरी मतवाली हो।

तुम ही मेरी अर्धांगिनी,

तुम ही मेरे जीवन की एकमात्र स्रोत हो।।


तुम ही मेरी अंजील हो,

तुम ही मेरी मंजिल हो।

डूबते को तिनके का सहारा,

तुम धूप में छाँव अलबेली हो।

तुम ही सवेरा, तुम ही शाम मेरी हो,

तुम ही हिम्मत, तुम ही ताकत मेरी हो।।


तुम ही हो, सिर्फ तुम ही हो।

इस बेचैन सी दिल को संभालने वाली,

इस पागलपन को ठीक करने वाली,

तुम ही वैद्य, चिकित्सक हो।।


तुम सूरज की किरण हो,

तुम प्यारी सी हिरण हो।

इस दिल को जो कर दे बाग-बाग,

तुम उन फूलों की संगम हो ।।


गुम हो गए मुसाफिर की आस तुम हो,

एक प्यासे की प्यास तुम हो।।

तुम अलबेली हो, तुम मतवाली हो,

तुम ही अर्धांगिनी, तुम ही जीवन की स्रोत हो।।


राम की तुम सीता हो,

जीवन की तुम गीता हो।

साथ निभाने वाली हर वक्त,

तुम तो जगत जीता हो।।


गुलाब की पंखुड़ी हो तुम,

इंद्रधनुष के सप्त रंग हो।

इस जीवन को झुमाने वाली,

खुशियों की तरंग हो।।

तुम अलबेली हो, तुम मतवाली हो

तुम ही अर्धांगिनी, तुम ही जीवन की स्रोत हो।।


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