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सोनी गुप्ता

Abstract Romance

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सोनी गुप्ता

Abstract Romance

तुम बहुत खास हो

तुम बहुत खास हो

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तुम फूल हो तुम सुगंध हो तुम हवा हो  

तुम हो मेरे लिए तुम बहुत ही खास हो


अपनी पलकों की छांव में मुझे बिठाया  

रंग हो रूप हो हर मर्ज की तुम ही दवा हो 


सब भूल जाता तुम्हारे चेहरे को देखकर 

तुम तो मेरे लिए जैसे भगवान की दुआ हो 


तुम्हें देख फूल खिलने का एहसास हुआ 

तुम तो कड़ी दुपहरी में एक ठंडी छांव हो 


तुम्हें देख गम भी खुशियों में बदल जाता

उदासियों में तुम मेरी खुशियों की वजह हो 


दिल में न जाने कितने ख्वाब संजो रखें हैं  

सभी ख्वाब पूरे होंगे तुम तो मेरी कल्पना हो ! 


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