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Rupesh Kumar

Romance

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Rupesh Kumar

Romance

तुम और मैं

तुम और मैं

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तुम और मैं

शायद एक डाली के दो फूल

कहीं काँटे तो कहीं कली

कोई नाज़ुक तो कोई कठोर,

कोई दर्द देता है तो कोई

दर्द लेता है


जीवन की यही रीति है

कोई रो रहा है कोई हँस रहा है

कहीं ख़ुशियाँ मन रही है

कहीं आँसू बह गया है,

जीवन में रास्ते भी अजनबी है

कब कहाँ अपना मिल जाये

ये कोई नहीं जानता

जो रुला कर चला जाये

लेकिन छोड़ जाता है

सिर्फ यादें ,

जो ना मरने देती है

और ना जीने देती है,


क्या करूँ ,

मर भी जाऊँगा तो

याद तुम्हें कौन करेगा

किसको सताओगी तुम

कौन तुम्हारी यादों मे

घुट-घुट कर मरेगा

तुम जो हो वो और नहीं

हो सकता

तुम्हारी मुस्कान, तुम्हारी चाहत

तुम्हारी आँखें, तुम्हारी नजरें

तुम्हारी खवाबों का समंदर

तुम्हारी खनकती चाल, प्यार

जो सबमें नहीं वो तुम में है,


तुम हो जो कोई नहीं

क्या बताऊँ तम्हें मैं

तुम मेरी आरजु हो

तुम मेरी जुस्तजू हो

तुम मेरी चैन

तुम मेरी रैन

तुम मेरी परछाईं

तुम मेरी हरजाई

क्या बताऊँ तुम्हें

तुम मेरी जीवन की जन्म हो

तुम मेरी जीवन की मृत्यु हो

क्या कहूँ जो ना ना कहूँ

वो सब तुम ही तुम हो !



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