STORYMIRROR

Sri Sri Mishra

Inspirational

4  

Sri Sri Mishra

Inspirational

टूटता तारा

टूटता तारा

1 min
218

नहीं मशग़ूल मैं उन सारे नज़ारों में

जो है भरा पड़ा तारों के हज़ारों में

है फ़रियाद कभी तुझे टूटता देखूंँ

पूरी होती मुराद मैं अपनी देखूंँ


लफ़्ज़ कुछ बिखेर देता हूंँ कि

तेरी नज़र उस पर कभी पड़ जाए

काश ! तू पढ़ रहा हो शौक से मुझे

देख ये आसमां के नीचे वो करिश्मा हो जाए


हो जाऊंँ गवाह उस झिलमिलाती रातों की बारातों का

चमकते जुगनू सा कुछ अपना नसीब हो जाए

घूँघट जब उतारता है तू ऐ चांँद

तेरी आवभगत में जुट जाते हैं वो तारे

यह नजारा कभी छुपे ना

आज उन जा़लिम बादलों से ज़रा शिकायत हो जाए


क़दम है ज़मीं पर निगाह है उस फ़लक के तारे पर

इश्क है तुमसे कुछ इस कदर तू टूटे मेरी हथेली पर

रूबरू तुझे पाकर दरमियां कुछ करीबी गुफ़्तगू हो जाए

एतराज है किस्मत की लकीरों को सदियों से

आतिशबाजी बन फूट पड़ने की हैं लवरेज से


ख्वाहिश तुझे छूने की ज़रा पूरी हो जाए

उन काली सर्द रातों को मेरे होने का वजूद तो पता चले

मेरी चाहत की नजा़कत में तू इस कदर टूटे

उस पल की मुंँह मांँगी दुआ पर वह नूर आ जाए।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational