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zindagi ki paheli

Romance

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zindagi ki paheli

Romance

टूटा हुआ ख्वाब

टूटा हुआ ख्वाब

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रात एक ख्वाब आंखों में धुआं धुआं जल रहा था 

निगाह-ए-पाक की लहरों तले तेरा प्यार पल रहा था

जागे नींद से सुबह तो दर्द था आंखों में गजब का

पलकों के किनारों पर रात भर तू चल रहा था


सोचते है तुझे तो दर्द और प्यार एक साथ महसूस करते हैं

करते हैं मुस्कुराने की कोशिश और फिर टूटकर बिखरते हैं

माना कि बीती यादों के साए से तुझे जुदा ना कर सके

आज भी हम साया बनकर तू साथ साथ चल रहा था


दिल से करके जुदा तेरे सुर्ख लबो पर सिसकियां क्युं है  

आंखों में बेपनाह मोहब्बत ,लफ्ज़ों में तल्ख़ियां क्युं है     

नकाब का फर्ज अदा किया ,तेरी मासूम नजरों ने 

डबडबाती हुई आंखों तले ,एक टूटा ख्वाब मचल रहा था   


वक़्त की गर्दिशों का गम छलक पड़ा मोहब्बत की रिवायत में

मेरी स्याही पे नहीं, गहराई पे उठ जाए सवाल-ए-सिलसिले                       

बहोत सोचकर लफ्ज़ कागज़ पे उतारते हैं मोहब्बत-ए-जज्बा़त में                            

थमें हुए वक्त की यादों का सफर,हाथ से रेत की मानिंद फिसल रहा था!


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