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zindagi ki paheli

Others

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बसंत ऋतु का आगमन

बसंत ऋतु का आगमन

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सर्द मौसम बीता,हुआ बसंत ऋतु का आगमन।

मधुबन में आई बहार,भर गया गुलों से खाली दामन।

नीर नयनन, सर्दी की ठिठुरन को तुम अब दे दो विदाई।

गुनगुनी धूप की लालिमा लिए मनभावन बसंत ऋतु आई।


वासंती हवा में सुहानी ऋतु ने, छेड़ा सुरीला गीत मल्हार।

बीता पतझड़, आई रे आई मनमोहक ऋतुराज बसंत बहार।

खेतों में लहराती पीली पीली सरसों, हौले से मुस्कुराई।

गुनगुनी धूप की लालिमा लिए, मनभावन बसंत ऋतु आई।


नव अंकुर लिए कलियों की इठलाती, मुस्कुराती वो मंद मंद अदा।

फूलों पर निखार छाया, मंडराते भंवरे हुए फूलों पर फिदा।

शोक फूलों की सुगंध हवा संग, बगियन में भी महकाई।

गुनगुनी धूप की लालिमा लिए मनभावन बसंत ऋतु आई।


चंचल नील गगन, मिल रहा गले वसुंधरा नव यौवन।

मिटे प्रतीक्षा के क्षण, कोयल छेड़ रही तान सुरीली मधुबन।

आम्र मौर को देख कोयलिया दीवानी कुहू कुहू गुनगुनाई।

गुनगुनी धूप की लालिमा लिए मनभावन बसंत ऋतु आई।


ऋतुओं की ऋतु कुसुमाकर, प्रेमियों में नई उमंग लाई मस्तानी।

जादूगर बसंत लाया प्रेम, टेसुं के रंग, मिलन और विरह की कहानी।

बिछड़े दिलों के सुर्ख वीरान रातों की अब नई भोर है आई।

गुनगुनी धूप की लालिमा लिए मनभावन बसंत ऋतु आई।


छाई कुदरत पर जवानी, प्रेम रंग घुला मदमाती गुलनार हवाओं में।

बसंती मधुमास का आरंभ, प्रीत रंग की होरी शोख घटाओं में।

प्यार के मौसम की पदचाप लिए प्रेम करने की सुहानी रुत है आई।

गुनगुनी धूप की लालिमा लिए मनभावन बसंत ऋतु आई।



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