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Madhu Vashishta

Abstract Action

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Madhu Vashishta

Abstract Action

ठंड के अलग मजे हैं

ठंड के अलग मजे हैं

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ठंड के अलग मजे हैं


गरम गरम चाय और पकोड़ों से थाल सजे हैं।


गुनगुनी सी ठंड, अलसाए से रजाई में बैठे हैं और मन में कई ख्वाब सजे हैं।


ठंड के अलग मजे हैं।


लकड़ियां भी भीग गई कल की बारिश में।


झोपड़ी की छत के तिरपाल फटे हैं।


ठंड में सिकुड़े हुए, ओड़ के पतली सी चादर,


अपने आप में ही सिमट कर चुपचाप पड़े हैं।


ठंड के अलग ही मजे हैं।


जीना है मुहाल और भारी बर्फबारी है।


जम रहा है खून लेकिन देश की आन जान से भी ज्यादा प्यारी है।


देश की रक्षा के लिए पेट्रोलिंग अब भी जारी है।


ठंड के अलग ही मजे हैं।


आओ इन मजों को बांट के दुगना हम कर लें।


जरूरतमंदों को देखें और उनकी सहायता हम कर लें।


जो वीर डटे है सीमा पर उनका धन्यवाद हम कर ले।


जब तक वह डटे हैं सीमा पर आओ उनके परिवार का ख्याल हम कर लें।


  


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