तर्ज : फूल तुम्हें भेजा है खत
तर्ज : फूल तुम्हें भेजा है खत
पैरोडी :
तर्ज : फूल तुम्हें भेजा है खत में
प्रेमी :
हुस्न की मलिका, रूप की रानी
या फिर हो तुम कोई परी (दो बार गाना है )
ये तो बता दे, स्वर्ग लोक से
किसके लिये तुम हो उतरी
प्रेमिका :
तेरी मुहब्बत, तेरी इनायत मुझे यहां तक ले आई (2)
हमदम मेरे, इतना समझ ले, तेरे लिये ही मैं आई
प्रेमी : हुस्न की मलिका, रूप की रानी ...
अंतरा -1
प्रेमिका :
तेरे दिल में रहने आई दुनिया से बचकर सजना
दुल्हन बनकर आऊंगी मैं एक दिन तेरे ही अंगना
खुशियों से घर भर दूं तेरा, बस यही मेरा सपना
प्रेमी :
हुस्न की मलिका, रूप की रानी या फिर हो तुम कोई परी
ये तो बता दे, स्वर्ग लोक से किसके लिये तुम हो उतरी
हुस्न की मलिका रूप की रानी ..
अंतरा नं -2
प्रेमी :
आओ चलें हम ऐसे जहां में जहां पे ना कोई गम हो
प्यार ही प्यार हो हर दिल में बस, खुशियां कभी भी ना कम हो
दिल दरिया हो, इश्क समंदर अहसासों की सरगम हो
प्रेमिका :
तेरी मुहब्बत तेरी इनायत मुझे यहां तक ले आई
हमदम मेरे इतना समझ ले तेरे लिये ही मैं आई
प्रेमी :
हुस्न की मलिका रूप की रानी या फिर हो तुम कोई परी
ये तो बता दे स्वर्ग लोक से किसके लिये तुम हो उतरी
हुस्न की मलिका रूप की रानी ..

