STORYMIRROR

Sandeep Suman Chourasia

Abstract

3  

Sandeep Suman Chourasia

Abstract

तीन तलाक

तीन तलाक

1 min
128

निरीह अबलाओं,

पारियक्ताओं, रजंजादाओं

की सुनी कातर,

करुण, हृदयदाही पुकार,


धर्म, वर्ग,सम्प्रदाय,

रूढ़ि, अंधविश्वासों से,

ऊपर उठकर मानवीय

न्याय को दिया अधिकार।


दकियानूसी सोच,

निहित स्वार्थ के जाल का,

लोकतंत्र के मंदिर ने

बंद किया आज अध्याय।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract