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Meena Mallavarapu

Abstract Inspirational

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Meena Mallavarapu

Abstract Inspirational

थकान थकेगी क्या कभी

थकान थकेगी क्या कभी

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थकान को भी कभी न कभी थकना ही था

थी नादानी मेरी, सोचा ऐसा हो नहीं सकता !

उदासी की हदें पार होनी तो थीं कभी न कभी

उस सीमा के उस पार भी होगा कुछ न कुछ!


वह 'कभी न कभी', वह 'कुछ 'आखिर है क्या

जानने का कौतूहल, करे मुझे बेचैन दिन रात

थकान को थकाना, है बच्चों का खेल नही

पाना फ़तह उदासी पर, कतई आसान नही


हदों को पार हो करना,जुटानी पड़ेगी हिम्मतें!

हदों के दायरे लांघने की हो जुर्रत, हो जुनून-

थकान, उदासी, अवसाद - कुंठा और क्लेश,

इन सब को धकेल परे, दूरियां होंगी नापनी!


विशाल,गहरे इस समुन्दर को, करना  होगा पार

हम बूंद भले हों छोटी सी, हैं तो उसी का हिस्सा-

है हर तत्व वही,वही सरगोशियां,वही हौसले बुलंद

पहुंच सकेंगे क्षितिज तक, है विश्वास अटूट,अटल


थकान को थका देंगे, उदासी मुस्कुराएगी अनायास

मंज़र हसीं हो आगे,कल्पना की उड़ान हो सार्थक।।


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