थक कर ना बैठ ए मुसाफ़िर
थक कर ना बैठ ए मुसाफ़िर
थक कर ना बैठ ए मुसाफ़िर आगे बढ़ जब तक है जान,
विश्वास रख खुद पर अभी तो बाकी है कितने इम्तिहान,
रास्तों की परवाह न कर बढ़ता जा बस मंज़िल की ओर,
खोल दे अपने पंखों को और भर लें तू एक ऊंची उड़ान,
सहारे की तलाश न कर तू खुद के दम पर बना पहचान,
बढ़ता जा अकेला राहों पे छोड़ते जा हौसलों के निशान,
अपने कदमों की तू रफ़्तार बढ़ा मंज़िल तो तेरे क़रीब है,
बढ़ता ही जा हिम्मत से आगे मुट्ठी में भर ले तू आसमान,
कितनी भी मुश्किलें आएं राहों में, हिम्मत से तू पार कर,
लड़खड़ाने ना दे अपने कदमों को, हर तूफ़ान से तू लड़,
फूलों पर चलकर तो नहीं मिल जाती मंजिल किसी को,
चलना पड़े अगर कांटों पर तुझे, तो कांटों पर भी तू चल,
डर जाएंगी सब मुश्किलें तेरी हिम्मत,तेरे हौसले को देख,
बस तू स्व-विश्वास के साथ, उम्मीद का दीया जलाए रख,
राहें भटकाएंगी तुझे, पर तू मंजिल पे रखना अपनी नज़र,
मंजिल तक पहुंचने के लिए तुझे मिल जाएंगे रस्ते अनेक,
तेरी मंजिल का रास्ता तो आगे है तू मुड़कर ना देख पीछे,
तेरा दृढ़ विश्वास तेरी हिम्मत ही तेरी सफलता को है सींचे,
बुलंद कर अपना हौसला, कर्म कर मेहनत के फूल खिला,
फिर दुनिया देखेगी तेरी सफलता इसी आसमान के नीचे।
