STORYMIRROR

Niranjan kumar 'Munna'

Romance

3  

Niranjan kumar 'Munna'

Romance

तेरी हँसी

तेरी हँसी

1 min
293

मेरी जिन्दगी में तू आई

सुहानी सी एक सुबह की तरह

हँसी की भवर में

छोटी सी सफर की तरह

काश तू पहले आई होती

तो यह फरेब नहीं होता

इश्क की बाजार में

मेरी सरेआम कत्लेआम नहीं होता।।


प्यार की वसियत को

तेरे नाम मैं लिखा होता

तेरी हँसी पर अपनी दिल

कब को कुर्बान किया होता।।


चाहत की चाह में

दुनिया उजड़ते नहीं देखा

मोहब्बत की आग में

तू किसी को जलते नहीं देखा।


मैं इस कदर गुजरा हूँ

प्यार की गलियों से

कांटों को गले का हार तू अभी,

बनते नहीं देखा

तू तो शायद समझ गई

मेरी ग़म की दास्तान की

तू अभी ग़म की दरिया में,

डूब कर नहीं देखा।।


तेरी हँसी आज भी

यह बयां कर जाती है

दर्द की सुहानी सी सफर

को हमसफर नहीं देखा।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance