STORYMIRROR

तेरी दासी

तेरी दासी

1 min
232


श्याम तेरे चरणों की धूल,

बनना चाहती हूँ।

ना राधा, ना मीरा

बनना चाहती हूँ।


अरज करत हैं दासी,

तुज दरस की प्यासी।

इस धूल पर बस

एक नज़र धर देना,

इन चरणों में

शरण पाना चाहती हूँँ।


बलिहारी जाऊँ

आपकी किस्मत पे,

तू नज़र उठाये तब तक,

धूल से फूल बन जाती हूँ।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama