तेरी अदा के मारे...!
तेरी अदा के मारे...!
तेरे आने की खबर मिल रही है,
मेरे आंगन की कलियाँ जो खिल उठी हैं
बड़ी खूबसूरती से मुझे तुम पुकार रही हो,
आखिर ठंडी हवाओं के ज़रिये बुला रही हो।
तेरी अदा के मारे हैं हम वैसे ही,
फिर क्यूँ और मुझे ऐसे सत्ता रही हो
अगर तुम्हें भी मोहब्बत हैं हमसे,
क्यूँ इतना घुमा कर बता रही हो।
हाँ तुम ख़्वाबों की वो इश्कबाज हो मेरी,
जो अब असल ज़िन्दगी को सवार रही हो
तुम इश्क़ के मौसम की बरसात हो शायद,
तभी तो मेरे दिल को प्यार से भीगा रही हो।
तेरी अदा के मारे हैं हम वैसे ही,
फिर क्यूँ और मुझे ऐसे सत्ता रही हो
अगर तुम्हें भी मोहब्बत हैं हमसे,
क्यूँ इतना घुमा कर बता रही हो।

