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Krishna Sinha

Abstract

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Krishna Sinha

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तेरे नाम

तेरे नाम

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जो छलका वो पैमाना है

जो बेसुध कर दे

हम होश में लाते हैं जनाब

बेहोशी में बूंदें बन के

उन छींटो से हम

जो गंगा जल

से पड़े चेहरे पर

कर दे तरो ताज़ा

ताज़गी की बूंदें बन के।



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