STORYMIRROR

bela puniwala

Abstract

4  

bela puniwala

Abstract

तेरे आस-पास

तेरे आस-पास

1 min
217

मैं हर पल तेरे पास हूँ,

तेरे आस-पास हूँ, 

जिसे ना चाहते हुए भी,


अपने आस-पास महसूस करोगी और 

जिसे ना चाहते हुए भी तुम,

रोज़ अपने खवाबों में पाओगी और 

जिसे चाह कर भी,


तुम कभी भुला ना पाओगी,

वो अनदेखा सा एक ख्वाब हूँ मैं,

मैं हर पल तेरे पास हूँ,

तेरे आस-पास हूँ...।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract