स्वतंत्रता
स्वतंत्रता
अपनी स्वतंत्रता को जाने ना देना ,हाथ पकड़ पास बैठा ही लेना ,
क्या पता ये दुबारा मिल ना पाये ,जीवन भर फिर यूँ ही पछताये।
जीवन अक्सर ही रहता साझेदारी ,परिवार तो कभी दोस्तों की बीमारी ,
ऐसे में अगर स्वतंत्रता मिल जाये ,फिर क्यों हम उससे आँख चुरायें ?
यूँ कहने को हमे सब लगते प्यारे ,पर मन करता स्वतंत्र बन जी लें सारे ,
और जब स्वतंत्रता मिल नहीं पाती ,तो खुद से भी अक्सर खीझ हो जाती।
तब लगते बहुत बुरे दुनिया के झमेले ,कभी लगता काश हम होते अकेले ,
अपने लिए तब थोड़ा सा समय चुराते ,स्वतंत्रता की खातिर सबके बुरे कहलाते।
इसलिये जब भी कभी स्वतंत्रता पाओ ,जितना हो सके उसमे घुल - मिल जाओ ,
वो क्षण होंगे जीवन के सबसे प्यारे ,जिसमे खुद से रूबरू होंगे हम प्यारे।
स्वतंत्रता तन और मन को शुद्ध बनाती ,दिलों पर कितने सपने बिखेर जाती ,
अपनी स्वतंत्रता को जाने ना देना ,हाथ पकड़ पास बैठा ही लेना।|
