STORYMIRROR

Praveen Gola

Inspirational

4  

Praveen Gola

Inspirational

स्वतंत्रता

स्वतंत्रता

1 min
352

अपनी स्वतंत्रता को जाने ना देना ,हाथ पकड़ पास बैठा ही लेना ,

क्या पता ये दुबारा मिल ना पाये ,जीवन भर फिर यूँ ही पछताये।

जीवन अक्सर ही रहता साझेदारी ,परिवार तो कभी दोस्तों की बीमारी ,

ऐसे में अगर स्वतंत्रता मिल जाये ,फिर क्यों हम उससे आँख चुरायें ?

यूँ कहने को हमे सब लगते प्यारे ,पर मन करता स्वतंत्र बन जी लें सारे ,

और जब स्वतंत्रता मिल नहीं पाती ,तो खुद से भी अक्सर खीझ हो जाती।

तब लगते बहुत बुरे दुनिया के झमेले ,कभी लगता काश हम होते अकेले ,

अपने लिए तब थोड़ा सा समय चुराते ,स्वतंत्रता की खातिर सबके बुरे कहलाते।

इसलिये जब भी कभी स्वतंत्रता पाओ ,जितना हो सके उसमे घुल - मिल जाओ ,

वो क्षण होंगे जीवन के सबसे प्यारे ,जिसमे खुद से रूबरू होंगे हम प्यारे।

स्वतंत्रता तन और मन को शुद्ध बनाती ,दिलों पर कितने सपने बिखेर जाती ,

अपनी स्वतंत्रता को जाने ना देना ,हाथ पकड़ पास बैठा ही लेना।|


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational