STORYMIRROR

Sudhir Srivastava

Abstract

3  

Sudhir Srivastava

Abstract

स्वार्थ का सिद्धांत

स्वार्थ का सिद्धांत

1 min
0

स्वार्थ का सिद्धांत  ******* स्वार्थ की भी अपनी दुनिया अपना सिद्धांत है  आज जिसके पास स्वार्थ का हथियार नहीं है  आज की दुनिया में वो बिल्कुल बेकार है। मैं तो निरा नादान था  स्वार्थ का सुख भी नहीं जानता था , पर भला हो मित्र यमराज का जिसने स्वार्थ का फलसफा समझाया  तब मेरे भूसा भरे दिमाग में कीड़ा कुलबुलाया, मित्र का आभार जताया, जलपान कराया  स्वार्थ के नाम का एक दीप जलाया  पूजा-पाठ और स्वार्थ मंत्र का जाप किया। पर यमराज को मुझ पर विश्वास ही न हुआ  और उसने मुझे स्वार्थ शपथ दिलाकर  अपनी शंका का समाधान किया  उसके बाद ही बंदा प्रस्थान किया। ईमानदारी से कहूँ,  तो अब मुझे भी काफी अच्छा लग रहा है, क्योंकि स्वार्थ का सिद्धांत अब  मुझे भी समझ में जो आ गया है। सुधीर श्रीवास्तव 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract