सवाल क्यों?
सवाल क्यों?
कई सवाल उठाने लगे हैं लोग
नाजुक छूईमुई के कैकट्स हो जाने पर,
नर्म फाहे के पत्थर हो जाने पर,
नदी के रेगिस्तान हो जाने पर।
बहुत अजीब लगता है ये सब
सवाल ये करते ही क्यों है सब,
कि अचानक कुछ नहीं होता,
वे पहले झांकते क्यों नहीं
अपने अंदर।
महसूस क्यों नहीं करते
अपनी उष्णता को,
जो रहती है मौजूद
हर नाजुक,नरम,बहाव पर।
फिर लगता है दोष
कहीं छुईमुई, फाहे और नदी का भी है
इन्हें बदलना नहीं चाहिए था,
बल्कि सहना ही नहीं चाहिए थी उष्णता।
इन्हें पूरा गुम हो जाना चाहिए था
सबके बीच से।
