स्वाभिमान
स्वाभिमान
स्वाभिमान से बढ़कर कुछ भी नहीं,
ईमान से बढ़कर कुछ भी नहीं।
स्वाभिमान तो एक खज़ाना है,
जिसे ख़ूब हमें संभालना है।
क्या साथ में लेकर आए थे,
क्या साथ लेकर हम जाएंगे,
खाली हाथों ही इस दुनिया से,
एक दिन तो चले हम जायेंगे।
फिर कैसा लोभ इस मोह माया का,
सब कुछ तो यहीं छोड़ जायेंगे।
साथ लेकर अगर कुछ जाएंगे,
तो नाम अपना साथ ले जायेंगे।
नाम अपने में है स्वाभिमान भरा,
हर दौलत से भी है जो इनाम बड़ा,
स्वाभिमान तो है जीवन अपना,
वरना क्या ख़ाक है ये जीवन अपना।
देखो इसको सदा संभालकर रखना,
भूलकर भी इसे कभी मत खोना,
धन दौलत से भी हरदम बढ़कर,
अपने स्वाभिमान को दिल से लगाके रखना।
