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Nalanda Satish

Abstract

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Nalanda Satish

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सुकून

सुकून

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जलाओ दिये हर तरफ कि रोशन अँधियारा भी हो

फैलाओ प्यार इतना कि गदगद नफ़रतो की साजिश भी हो


कल्पना की गर्दिशों में किस्मत पींगें भरती है

मेहनत के दम पर नसीबों की हेराफेरी भी हो


किसने कितना सहा है ,यह दर्द देनेवाले क्या जाने

जख्मों की हरियाली में मरहमों की छोटी सी कुटिया भी हो


बनती बिगड़ती जिंदगी में अनजान ख़्वाहिशों को कर दो दफन 

बात गर बेखुद जीने की हो तो दिल का सुकून भी हो


अपनी गलतियों और झूठ पर गुरूर करनेवाले

कैसे समझोगे बेकसूर को 

सच्चाई के गलियारों में एहसासो के जज्बात भी तो हो


माना हमे बदनाम करने की साजिश में हमेशा शामिल रहते है 'नालन्दा' वह

पर उनकी हस्ती में उतनी बुलंद ताकत भी तो हो.



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