सुबह
सुबह
आई ताजगी भरी सुबह, धरती कर ली नव श्रृंगार।
फूल कली खिलने को आतुर, करते रवि का इंतजार।
चहचहा रहे विहग दल, पाकर प्रकृति का उपहार।
पास आकर कहती किरणें, कर लो सबसे प्यार।
नव पल्लव का रंग निखरा, नदियों की कलकल धार।
खेतों में लहलहाती फ़सलें, सौंदर्य से भरा संसार।
विविध रंगों में रंगी प्रकृति, समझाती जीवन सार।
देखो खोल हृदय के पट, वो है अनुपम चित्रकार।
सुबह देती संदेश रोज,कभी न मानो हार।
जी लो जीवन हँसकर, हटाओ मन से अहंकार।
