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Prashant Beybaar

Abstract

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Prashant Beybaar

Abstract

सुबह एक दफ़ा इतर छिड़का था तुमने

सुबह एक दफ़ा इतर छिड़का था तुमने

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सुबह एक दफ़ा इतर छिड़का था तुमने

दिन मेरा पूरा महका महका सा गुज़रा



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