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ritesh deo

Abstract

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ritesh deo

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सरकारी नौकरी

सरकारी नौकरी

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सोच तेरी यह भौतिकवाद की

इक दिन तुझे खाक में मिलाएगी

देह अभिमानी न कर विलास ज्ञान तू

यह भी इक दिन चिता में जल जाएगी...


कितने बच्चों को तुमने नोच डाला है

इस कलुषित मानसिकता ने

मासूम सपनों को , 

बड़ा खरोंच डाला है.


क्यों तुलना अपनी औलाद की

दुनिया से करते हो

सरकारी नौकर और धन की ही बस

क्यों जी हुज़ूरी करते हो..?


सरकारी सेवा अच्छी बात है

कोशिश कर रहे है आपके बच्चे

यह भी सच्ची बात है


तब भी क्यों तुम इतने ताने देते हो

हर छोटी गलती पर दस बातें कहते हो

क्या बस यही पैमाना है जीने का

विकल्प एक यही है अब विष पीने का..


जिन्हें न मिली जॉब

वो मर जाये क्या

दुनिया के तानों से

डर जाएं क्या...?


आखिर तुम चाहते क्या हो

दुसरो को देख उनमें

आखिर

पाते क्या हो...?


अनमोल का मोल समझे नही तुम

तो गलती किसकी

समय के सामने नतमस्तक है वो

यहाँ नही चलती उसकी...


तुम्हे हीरा नायाब मिला है

रेगिस्तान में जैसे कोई गुलाब खिला है

दुनिया के दिल की भांति है वो

राजस्थान का जैसे अजमेर जिला है...


काल के आगे 

इंसान का ज़ोर नही चलता है

कौन है यहाँ 

संघर्ष जिसका कभी नही फलता है...


स्वयं को थोड़ा तो अब जानो तुम

क्या खास है तुझमें 

उस खूबी को

अब पहचानो तूम...


जिन्हें करना है, वो कर जाएंगे

जो बुद्ज़िल होंगे, वो मर जाएंगे..


पर तुमको जीना होगा

गरल है तो भी,

इन नयन नीर को पीना होगा...


सच है वक़्त लगता है 

वक़्त बदलने में पर

हकीकत यही है,.

वक्त तो ज़रूर बदलता है..

निगल जाओ इन तानों के विष को प्यारों

विश्व विजेताओं का यौवन


कुछ ऐसे ही पलता है...

कुछ ऐसे ही पलता है....


 हर एक युवा विद्यार्थी जो अभी सरकारी नौकरी नही कर रहा है या नही प्राप्त कर सका है वह, बहुत काबिलियत या टैलेंट के बावजूद भी समाज और परिवार के तीक्ष्ण तानों की रडार में आ ही जाता है। यह स्थिति हममें से अनेकों की हो सकती है।

बेशक सरकारी नौकरी की चाह बुरी नही है, लेकिन यह भी सत्य है कि एक बहुत बड़ी संख्या तो इससे वंचित ही रहेगी।



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