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Gaurav Shrivastav

Abstract

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Gaurav Shrivastav

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सफर तेरे साथ - २

सफर तेरे साथ - २

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ये सफर बस चलता रहा,

तेरा हाथ मेरे हाथो से कुछ यूं मिला,

कि ये तकरार होता रहा,

और तेरा मेरा सफर बस चलता रहा।


सभी मुसीबतों में सभी परेशानियों में,

ये रिश्ता मजबूत होता रहा,

कभी गुस्सा कभी दर्द में,

ये प्यार बस बढ़ता रहा।


हर डर को तेरे मिटाता रहा,

हर नाराज़गी को सहता रहा,

मिलने की बेचैनी को भी रोका,

तुझे देख तेरा ऐतबार करता रहा,

यूं ही तुझसे प्यार करता रहा।


सफर ये तेरे साथ सुहाना है,

नफ़रत तो प्यार जताने का एक बहाना है,

तुम सदा यूं मुस्कुराते रहना,

सफर में साथ हमेशा निभाते रहना।


तेरे लिए कविता लिखता रहा,

ये सफर बस चलता रहा।


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