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Neerja Sharma

Abstract

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Neerja Sharma

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संतुष्टि

संतुष्टि

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202

करोना के इस काल में

मन रहता बेचैन

क्या करें ,क्या न करें

मन रहता परेशान।


मन को कहीं संतुष्टि नहीं

हलचल रहे मन में हर पल 

सब कुछ सबके पास है 

फिर भी तरसे है दिल।


डर का आलम छाया है 

संतोष कहीं न आया है 

जो भी कर लो चाहे जितना 

बस बेचैन ही पाया है ।


क्या क्यों के बीच में 

मन रहता डाँवाडोल

खुशी मानो हवा हो गई 

मन ढूँढे संतुष्टि के पल ।



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