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Neeraj Bhatt

Romance Fantasy

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Neeraj Bhatt

Romance Fantasy

"संदेशा...

"संदेशा...

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वादे तो किए थे बहुत, साथ निभाने के,

अगर हम अकेले हमसफर होते तो क्या बात थी !


चाहने वाले तो बहुत थे शायद उनके इस जहां में,

किसी एक से भी वफ़ा निभा देते तो क्या बात थी !


जलाते हैं उंगलियां रातों में तारे गिन कर,  

अगर इनमें एक दूसरे को ढूंढ रहे होते तो क्या बात थी !


इश्क के समुंदर में लगाया था गोता साथ में,  

अगर किनारे भी साथ में आते तो क्या बात थी !


इस तन्हा भरी जिंदगी में बिखरे हैं मोती की तरह,  

अगर धागे साथ में पिरोते तो क्या बात थी ! 


आ गया समझ में जमाना अदाकारी उनकी देखकर,  

अगर वो सच में अदाकार होते तो क्या बात थी !


हौसला बढ़ाते हैं खुद अपनी पीठ थपथपाकर,  

अगर हाथ उनका होता तो क्या बात थी !


जमाने से लड़ भी लेते उनके खातिर,  

अगर वो खुद जमाना न बनते तो क्या बात थी !


 स्याही जाया हो रही है यूं शब्द लिखने में,  

अगर वो बिछड़ते ही ना तो क्या बात थी,


 "खैर जाने भी दो क्या फर्क पड़ता है.... !


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