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RAJESH KUMAR

Inspirational

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RAJESH KUMAR

Inspirational

समय हर मर्ज की दवा

समय हर मर्ज की दवा

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हम जी रहे थे 

हम सीख रहे थे,

 हम खेल रहे थे 

हम खिला रहे थे।


अचानक कोविड-19 

दुनिया में, भूचाल लाया,

 कोई कुछ समझ, ना पाया 

कौन है, इसको लाया।


 सब कुछ बदल गया 

एक से दूसरे, 

दूसरे से पूरी दुनिया 

में, हवा से फैल गया    


सब रुक, गया 

सब ठहर गया,

सब  जन बेबस 

सब लाचार हो गए।


उम्मीदों की किरण 

नहीं, दिखाई देती।

 सोच सोच कर 

रूह सिहर जाती,

कैसी घड़ी थी, आई।


मौत का आंकड़ा 

बढ़ता ही जा, रहा था।

वैज्ञानिक, हतप्रभ

परेशान हैरान थे।


स्कूल कॉलेज 

सब ठहर गए

 जिंदगी जीने का 

संघर्ष झेल रहे।


बीमार वृद्धों 

का जैसा काल, 

बनकर आया ।

 बंद घरों, में रहना, 

जैसे दूभर हो रहा।


डॉक्टर,पुलिस ने

सब कुछ, झोंक दिया,

लोगों को बचाना

ऐसा, सोच लिया।


नया साल आया

 नई, उम्मीदों का,

 टीका लाया 

वही उत्साह लाया।


 दुनिया का मेला 

फिर लगने लगा,

 जल्द सब पुरानी 

बातें, कहानी होंगी।


सबके चेहरों पर 

खुशी, निराली होगी, 

सब की, दिवाली

सब की होली होगी।


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