समझ पाता हूँ !
समझ पाता हूँ !
आंखों में तारे सिमट रहे हैं
महसूस करता हूं।
आंखों में तितलियाँ नाच रही हैं
मैंने देखता हूँ।
इन भावनाओं से डरना क्यों?
समझ न पाता हूँ !
खामोशियों में भी हजार बात सुनाई देती हैं
प्यार का सौगात अमर प्रेम है।
यह समझ पाता हूँ !

