End of Summer Sale for children. Apply code SUMM100 at checkout!
End of Summer Sale for children. Apply code SUMM100 at checkout!

Ânkît Môüryâ

Tragedy


5.0  

Ânkît Môüryâ

Tragedy


सिर्फ तुम

सिर्फ तुम

1 min 110 1 min 110

ना जाने उस दिन वो क्या छिपा रही थी

कि बिन मौसम के भी बरसात आ रही थी


कि उन ठहरी  निगाहों में  नमी तो बहुत थी

लगता है शायद कही उसे मेरी याद आ रही थी


क्या बताऊँ तुम्हे

कि जिंदगी में पीछे क्या छोड़ कर आया हूँ 


कि जिसकी हँसी पे जिंदा था

आज उसे रोता छोड़कर आया हूँ


हम रोए तो बहुत मगर मुँह फेर कर रोए

बड़े मजबूर थे जो दिल तोड़ कर रोए

उनके सामने करके उनकी तस्वीर के टुकड़े

उनके जाने के बाद उसे जोड़कर रोए



Rate this content
Log in

More hindi poem from Ânkît Môüryâ

Similar hindi poem from Tragedy