STORYMIRROR

Richa jain

Tragedy

2  

Richa jain

Tragedy

सीधीबात

सीधीबात

1 min
107

आ,

न ।

आजा,

न आना।

आ तो सही,

नही..

आ भी जा...

ना।

आती है या?

क्या?

मुझसे जबान लड़ाती है?

रूक!आज तेरी हेकड़ी निकालता हूं।

तू मुझे, न कही।

तेरी इतनी हिम्मत!

आज ही, अभी,

तुझे घर तो क्या,

दुनिया से उठाता हूं।

तूने मेरे गुस्से को आग लगाई?

आज ही रातों रात तुझे

जिंदा आग लगाता हूं।।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy