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Richa jain

Tragedy

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Richa jain

Tragedy

सीधीबात

सीधीबात

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आ,

न ।

आजा,

न आना।

आ तो सही,

नही..

आ भी जा...

ना।

आती है या?

क्या?

मुझसे जबान लड़ाती है?

रूक!आज तेरी हेकड़ी निकालता हूं।

तू मुझे, न कही।

तेरी इतनी हिम्मत!

आज ही, अभी,

तुझे घर तो क्या,

दुनिया से उठाता हूं।

तूने मेरे गुस्से को आग लगाई?

आज ही रातों रात तुझे

जिंदा आग लगाता हूं।।



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