STORYMIRROR

Nisha Mandani Menda

Abstract Inspirational

4  

Nisha Mandani Menda

Abstract Inspirational

शुकराना...

शुकराना...

6 mins
1


किसी ने तुम्हारे अपनों का ख्याल तुम जैसा नहीं रखा होगा,
और रखे भी तो तुम्हें यकीन कैसे होगा,
तुम तो बैठे हो कोसों दूर,
मन मारकर, दिल मजबूर!

कुछ चीज़ें सुलझ जाएँ,
तो ज़िंदगी होती कितनी आसान,
सब हासिल आसानी से हो,
फिर ज़िंदगी की क्या होगी पहचान?

मुश्किलों से लड़कर, हमने अपना दौर बनाया था,
पत्ता-पत्ता जोड़, अपना आशियाना सजाया था,
फिर एक झोंका हवा का आया,
सब तहस-नहस कर चला गया!
हम खड़े रह गए उन राहों में,
ढूँढते खुद को खुद की निगाहों में!

एक सुकून सी बेहोशी है,
खलता फिर से खालीपन,
सब साथ हैं,
फिर भी भटकता यह मन!

कुछ चाहतें हैं, कुछ ख्वाहिशें भी,
कुछ सपने, कुछ उम्मीदें भी!

उन्हें साकार करने में जिंदगी निकल गई,
कुछ टूटे, कुछ बिखरे,
कुछ हमको बदल गई!

अब हर रोज़ एक नया दिन जीते हैं,
रब का शुकराना करते हैं,
कि अपनों से दूर ही सही, तूने जिंदगी तो दी,
जो मिला है मुझे जिंदगी में अब,
वह मेरे सपनों से भी बेहतर है सब!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract