J P Raghuwanshi
Inspirational
शरद काल आया।
सबके मन भाया।
गर्म पवन छूमन्तर।
व्योम हुआ बेहतर।
छिटकी है चांदनी।
मगन है भामिनी।
शीतलता आई।
अंग-अंग समाई।
शोभा को हैं पाया।
"शीतकाल"
"सुख-दुख"
"सीख"
"बदलाव"
सफलता
"विविधता"
"धन"
जिन्दगी
सच्चा सुख
"नारी"
मज़हब का मिट्टी से क्या लेना-देना ईश्वर-अल्लाह जब एक है, समझकर भी नहीं समझते इसी का त मज़हब का मिट्टी से क्या लेना-देना ईश्वर-अल्लाह जब एक है, समझकर भी नहीं समझते...
ना किसी को मानना चाहता है। मेरा ये बेचैन सा मन ना जाने क्या चाहता है। ना किसी को मानना चाहता है। मेरा ये बेचैन सा मन ना जाने क्या चाहता है।
दो आधे आधे मिले तो एक ही तो हुए। बस एक… दो आधे आधे मिले तो एक ही तो हुए। बस एक…
प्रेम की बातें खुद ही सीखेंगे अपने फर्ज को वेखुद जानेंगे ! प्रेम की बातें खुद ही सीखेंगे अपने फर्ज को वेखुद जानेंगे !
तब तक आप यूँ ही खिलखिलाओ ये मेरी है कामना तब तक आप यूँ ही खिलखिलाओ ये मेरी है कामना
आज़ाद था आजा़द हूँ आज़ाद रहूँगा! बन के लहू देश की नस-नस में बहूँगा! आज़ाद था आजा़द हूँ आज़ाद रहूँगा! बन के लहू देश की नस-नस में बहूँगा!
जीवन एक खूबसूरत यात्रा है,जिसमें भाग्य हमें चमत्कार दिखाता है। जीवन एक खूबसूरत यात्रा है,जिसमें भाग्य हमें चमत्कार दिखाता है।
सिर्फ़ शक की बुनियाद पर एक उम्र बीत जाती है घर को घर बनाने में सिर्फ़ शक की बुनियाद पर एक उम्र बीत जाती है घर को घर बनाने में
ठंडी जगहों में जाकर सैर - सपाटे का मज़ा भी लेते हैं , ठंडी जगहों में जाकर सैर - सपाटे का मज़ा भी लेते हैं ,
है अच्छुण क्षण भंगुर यह जीवन, अगले पल का पता नहीं। है अच्छुण क्षण भंगुर यह जीवन, अगले पल का पता नहीं।
सर्वदा, सर्वप्रथम, बना यही इनका कर्तव्य पथ। सर्वदा, सर्वप्रथम, बना यही इनका कर्तव्य पथ।
जमीं पर हैं कदम मेरे, नहीं है खौफ गिरने का। जमीं पर हैं कदम मेरे, नहीं है खौफ गिरने का।
यह दिल है हमारा दिन-रात धड़कता रहता है। हर सेकंड धड़कता रहता है। यह दिल है हमारा दिन-रात धड़कता रहता है। हर सेकंड धड़कता रहता है।
यह टूट कर भी धड़कता है, यह टूटकर भी बहकता है। यह टूट कर भी धड़कता है, यह टूटकर भी बहकता है।
जिसका अतीव प्रतिकूल प्रभाव मौसमों व ऋतुओं पर पड़ा। जिसका अतीव प्रतिकूल प्रभाव मौसमों व ऋतुओं पर पड़ा।
कीर्ति भूति जब जहॉं जिसने पाई वह ज्ञानी जनों की कृपा से पाई। कीर्ति भूति जब जहॉं जिसने पाई वह ज्ञानी जनों की कृपा से पाई।
मनुष्य संसार में जीना है तो, मनुष्य .....मनुष्य जैसे जीना चाहिए। मनुष्य संसार में जीना है तो, मनुष्य .....मनुष्य जैसे जीना चाहिए।
चलता हूं धरती पर लक्ष्य पाने को रहता हूं मैं कार्यरत चलता हूं धरती पर लक्ष्य पाने को रहता हूं मैं कार्यरत
अवश्य पहुंचेगा, तू फ़लक तक परिंदा अपने हौंसलों को रखना, बस तू जिंदा। अवश्य पहुंचेगा, तू फ़लक तक परिंदा अपने हौंसलों को रखना, बस तू जिंदा।
जीवन एक यात्रा है बस चलते ही जाना है जो भी आज यहां पर हैं उन्हें कल कहीं जाना है। जीवन एक यात्रा है बस चलते ही जाना है जो भी आज यहां पर हैं उन्हें कल कहीं जाना...