STORYMIRROR

Sumita Sharma

Inspirational

2  

Sumita Sharma

Inspirational

सहर

सहर

1 min
105

रात इतराती रही 

स्याही पे अपनी यूँ ही 

सहर ने हँस के कहा

कोख़ में सूरज है मेरी


आपदा पस्त हुई

तंगदिल ताकत को लिए

रब ने भी हँस के कहा

तू भी तो मूरत है मेरी


రచనకు రేటింగ్ ఇవ్వండి
లాగిన్

Similar hindi poem from Inspirational