STORYMIRROR

Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract

2  

Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract

शिव स्तुति

शिव स्तुति

1 min
91

शिव ही सनातन शिव ही शुद्ध मन है

इस ब्रह्मांड से है परे,

शिव ही विराट गगन है

शिव ही चेतन है शिव ही अचेतन है

शिव ही आत्मा,शिव ही परमात्मा बदन है

तू भज ले,मनवाॐ नमः शिवाय

शिव ही तोड़ता,भव का बंधन है !


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract