शिक्षा का लक्ष्य
शिक्षा का लक्ष्य
हमारे रोबोट, कम्प्यूटर भावनाओं,
संवेदनाओं को समझ रहे हैं,
अभिव्यक्त कर रहे हैं,
मानवीय तकनीकी विकास की
बड़ी उपलब्धि,
अधिकांश मानव भावशून्य
और कृत्रिम अभिव्यक्ति में जी रहा है,
मानव –मानव कम होता जा रहा है
कृत्रिम मानवीय जीवन की कृत्रिम उपलब्धि
कोई आपको याद दिलाये।
आज पावन पर्व की बेला है,
आज आपको खुश है होना,
आज आपको है, उल्लास मनाना,
अलग-अलग सी सूची हैं,
किन-किन को बधाई है देनी,
किन-किन को मिठाई है देनी,
कृत्रिमता में जीते –जीते,
सच से कोसों दूर हुए,
झूठे वादे – झूठे सपने,
थोथले व्यवहार हुए
शिक्षा मानव का मौखुटा है,
शिक्षा से सब फसाद हुए।
शिक्षा ने राज –समाज बादल डाला,
झूठे शिक्षा के ठेकेदार हुए,
तर्क –स्वात्यता किनारे रह गई,
कृत्रिम शिक्षा के आधार हुए,
भेदभाव–अलगाव की बातें
ये सब शिक्षा के सरोकार हुए,
थोड़ा अटके, थोड़ा भटके,
थोड़ा –थोड़ा बदलें हम
नव होना पहला लक्ष्य
ऐसी शिक्षा समझे हम।
दिवाली का पर्व बनाएँ,
अपने भीतर दीप जलाए
स्वयं प्रकाशित होने को,
दीप –पर्व की शुभकामनायें।
