PRATAP CHAUHAN
Classics
बनाकर शीशमहल का अटास।
बना मत जमी का तू उपहास।।
दया का दान बना दो खास।
न हों लाचार कभी भी उदास।।
जगत में पंचतत्व का वास।
बनाते माटी का इतिहास।।
सृष्टि का अद्भुत ये है लिबास।
जिसे ओढे सृष्टि बिंदास।।
ठिठुरन वाली
सहस्र वनिता
ओमकारा
पर्यावरण बचाए...
दुल्हन बन दुख...
इंसानियत
आजादी की बाते...
प्यार को पाकर
ताल मृदंग बजा...
भारत ने ख्यात...
बीच में धारण कर चक्र को देखो कैसे लहराए। बीच में धारण कर चक्र को देखो कैसे लहराए।
शांति की तलाश में किसी कोने में छिपकर बैठा है ये दिल। शांति की तलाश में किसी कोने में छिपकर बैठा है ये दिल।
छोड़ कर सब माया नगरी, चल विश्राम तो करे।। छोड़ कर सब माया नगरी, चल विश्राम तो करे।।
भगवान बनाए रखें इनके घर-संसार यही कामनाएँ हमारी बारम्बार॥ भगवान बनाए रखें इनके घर-संसार यही कामनाएँ हमारी बारम्बार॥
द्वापर में लिया विष्णु जी ने , श्रीकृष्ण के रूप में अवतार। द्वापर में लिया विष्णु जी ने , श्रीकृष्ण के रूप में अवतार।
लगाते नारे ये राष्ट्र द्रोही, वो त्याग स्वारथ में सब भुलाकर।। लगाते नारे ये राष्ट्र द्रोही, वो त्याग स्वारथ में सब भुलाकर।।
समय का सदुपयोग करे और बने एक अच्छा इंसान। समय का सदुपयोग करे और बने एक अच्छा इंसान।
श्री विष्णु के अवतार की जय कन्हैया लाल की नन्द के गोपाल की।। श्री विष्णु के अवतार की जय कन्हैया लाल की नन्द के गोपाल की।।
संग तुम्हारे हम सबने जो, अति सुन्दर वक्त गुजारा। यादगार ये पल सदा रहेंगे, इनके लिए आ संग तुम्हारे हम सबने जो, अति सुन्दर वक्त गुजारा। यादगार ये पल सदा रहेंगे, ...
पर क्या हममें अभी भी इसे समझ पाने की चेतना शेष है…? पर क्या हममें अभी भी इसे समझ पाने की चेतना शेष है…?
एक नया भारत बनने को था एक सपना हकीक़त में उतरने को था। एक नया भारत बनने को था एक सपना हकीक़त में उतरने को था।
सब यहीं रह जाएगा खाली हाथ ही आए थे और खाली हाथ ही जाओगे यारों। सब यहीं रह जाएगा खाली हाथ ही आए थे और खाली हाथ ही जाओगे यारों।
हाथ पकड़ चलते दोनों, ले साथ प्रकृति को जीवन में। हाथ पकड़ चलते दोनों, ले साथ प्रकृति को जीवन में।
और हमारी दीवानगी के साथ आपकी बेरुख़ी भी धीरे से घुलमिल गई। और हमारी दीवानगी के साथ आपकी बेरुख़ी भी धीरे से घुलमिल गई।
यादें कभी हंसाती है…कभी रोने का सबब भी बन जाती हैं… यादें कभी हंसाती है…कभी रोने का सबब भी बन जाती हैं…
ऐसा दूसरा कोई यहां ऐसा फरिश्ता मिलता है। ऐसा दूसरा कोई यहां ऐसा फरिश्ता मिलता है।
हैं बचपन की खट्टी-मीठी यादें, मिठास इस रिश्ते में घोल जाते। हैं बचपन की खट्टी-मीठी यादें, मिठास इस रिश्ते में घोल जाते।
मौसम को चिट्ठी लिखें, तब बरसे है नीर।। मौसम को चिट्ठी लिखें, तब बरसे है नीर।।
देश का मान सम्मान घर घर तिरंगा हर घर तिरंगा। देश का मान सम्मान घर घर तिरंगा हर घर तिरंगा।
तुमसे कुछ नहीं कहना… ख़ामोशी से अब तन्हा है चलना… तुमसे कुछ नहीं कहना… ख़ामोशी से अब तन्हा है चलना…