शीर्षक - सीख
शीर्षक - सीख
कितना प्यारा था बचपन
पिता की स्नेहिल छांव में
आदर्शों से गढ़कर हमको
जीना सिखलाया संसार में
कर्म पथ की राह दिखाकर
चलना सिखलाया संसार में
स्वाभिमान की रक्षा कर जीना
सिखलाया जीवन के संग्राम में
"सुख की उजली किरण हों
या दुख की परछाई में
कभी न हारो तुम
जीवन के संघर्ष में"
याद रहेगी हरदम मुझको
पिता की सीख हर इम्तिहान में।
