STORYMIRROR

Manju Saini

Tragedy

4  

Manju Saini

Tragedy

शीर्षक:कभी तो…..

शीर्षक:कभी तो…..

1 min
378


कभी तो हंसाया होता तुमने

कभी तो रुलाया होता तुमने

कभी तो झगड़ा किया होता तुमसे

कभी तो गिला शिकवा किया होता तुमसे

      मुझे तो कोई शिकवा नहीं तुमसे

      मुझे तो कोई शिकायत भी नहीं तुमसे।

कभी तो दूर किया होता तुमने

कभी तो पास बुलाया होता तुमने

कभी तो करीब समझा होता तुमने

कभी तो कुछ मान दिया होता तुमने

      मुझे तो कोई शिकवा नहीं तुमसे

      मुझे तो कोई शिकायत भी नहीं तुमसे।

कभी अपना ही नहीं समझा तुमने

कभी बेगाना भी नहीं किया तुमने

कभी कुछ बताया भी नहीं तुमने

कभी कुछ समझा ही नहीं तुमने

      मुझे तो कोई शिकवा नहीं तुमसे

      मुझे तो कोई शिकायत भी नहीं तुमसे।

             "मंजु को कोई गिला नहीं तुमसे"


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy