STORYMIRROR

Bindiya rani Thakur

Abstract

2  

Bindiya rani Thakur

Abstract

शब्दों के मोती

शब्दों के मोती

1 min
134

शब्दों के मोतियों को कागज पर समेट रहे हैं 

हम आज -कल कविता लिखना सीख रहे हैं 


मन के बिखरे ख़्यालों को नई शक्ल दे रहे हैं 

कोरे कागज़ पर नई-नई इबारत लिख रहे हैं 

  

सुन्दर अल्फ़ाजों को कागज पर उकेर रहे हैं 

दिल पुरसुकून हो गया है, जबसे लिख रहे हैं 


 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract