शायरी
शायरी
इरशाद किया है
,,
वो निकलती है सामने से रोज़ नई वेकैंसी की तरह...
//
ग़ौर फरमाइएगा..
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वो निकलती है सामने से रोज़ नई वेकैंसी की तरह...
//
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मै उसे देखता रह जाता हूं बेरोज़गार की तरह..
इरशाद किया है
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वो निकलती है सामने से रोज़ नई वेकैंसी की तरह...
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ग़ौर फरमाइएगा..
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वो निकलती है सामने से रोज़ नई वेकैंसी की तरह...
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मै उसे देखता रह जाता हूं बेरोज़गार की तरह..