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NOOR E ISHAL

Classics Inspirational Others

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NOOR E ISHAL

Classics Inspirational Others

सहारों को सहारे की ज़रूरत हुई जबसे

सहारों को सहारे की ज़रूरत हुई जबसे

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सहारों को सहारे की ज़रूरत हुई जब से
ढूँढने हम भी जिंदगी को चल दिये तब से. 

जहाँ हर शख्स खुद ही इक अधूरा ख्वाब हो,
वहाँ क्या आस रखें हम कोई हमारे साथ हो.

तेरे वादों को इन्तज़ार ने बामुश्किल सम्भाला है,
चलेंगे तन्हा मंज़िल को यही इक हल निकाला है.

लहजों की तेज़ी ओ तलख़ी से ज़ख्मी थे हम,
मिठास लहजों की, ज़हर सा कर गयी करम.

फिर ना सुकून नमक में ना था मिठास में,
और ज़िंदगी कटती रही तेरी ही आस में.

कोशिशें देखकर भी मेमंज़िल ए मक़सूद बता देख इस हाल मेंरी क्यूँ आती नहीं साथ में. 

सवाल उलझे थे इस तरह कि जवाब सँभाल ना पाये, बेबुनियाद बातें थीं किरदार ए बावफा उछाल ना पाये.

वो सब तलाशते रहे मेरे अक्स में खामिया़ँ दिन ओ रात, मेरी सादगी की किताब से एक भी पन्ना निकाल ना पाये.

हवाओं ने साज़िशें कीं इस चराग़ को बुझाने की मगर, रौशन था दुआओं से मुसलसल जो दीया बुझा ना पाये.

वो समझते रहे हमारी ख़ामोशी को बेबसी का एक नूर, वक़्त ने ली करवट जब फिर वो नज़र मिला ना पाये. Noor Ey Ishal


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