आँखों की गहरी झील में..
आँखों की गहरी झील में..
आँखो कीे गहरी झील में प्रतिपल
नर्म सी चाँदनी ठहरे कुछ पल
नींद की वो मीठी मीठी सी बूँदें
सुकून दे हर थकावट को उतारें
तारों की चुप्पी में लिपटा ये पल
और ख़ुशबू का जादू चले हरपल
हर सपना रेशमी पर्दों में बुनता गीत
क़ायम करे दिल के सुकून की रीत
ना कोई आँसू ना उलझन का शोर
बस प्यारी सी हँसी उम्मीदों की भोर
जो बीता सो बीता ये रात नई कहानी लायेगी
कामयाबी की हवा खुशियाँ फैला जायेगी
अब सो जाओ... ना हलचल ना सवाल
सपनों के सुंदर गाँव में मिलेगा हर ख्याल
मीठे सच्चे और रौशन जैसे तुम्हारा मन
तुम्हारे सपनों का चाँद से है ऐसा बंधन
NOOR E ISHAL
