पापा की परियाँ
पापा की परियाँ
आज पढ़ा
था कहीं
चाँद पे परियाँ
रहती हैं
अब सवाल ये है
वो पापा की
क्या लगती हैं
ये रिश्ता चलन
में आया कैसे
हम तो पल गये
ऐसे ही वैसे
हमारे ज़माने में
तो
एक कन्या
भी भारी थी
बड़े खस्ता हाल
में नारी थी
अचानक ये ट्विस्ट
आया कहाँ से
बेटियाँ बन गयी
परियाँ जहांँ से
चलो अच्छी बात है
पापा का साथ है
दुआ यही है
ये परियाँ
सास के यहाँ
भी रहें ऐसी
ना समझा जाये
इन्हें मशीन जैसी
NOOR EY ISHAL
