STORYMIRROR

Bhupendra kumar jain

Drama

3  

Bhupendra kumar jain

Drama

सेलफोन

सेलफोन

1 min
187

इस सेलफोन की दुनिया में

रिश्तों को सिमटता देखा है

चाहे नेटवर्क कितना भी मजबूत हो।


अपनों को अपनों से दूर होते देखा है 

यहां Watsapp पर खुशियों का इजहार हो जाता है

और facebook पे लोगो को प्यार हो जाता है 

ये दुनिया सेलफोन कि है रिश्तों को सिमटे देखा है।


इसके आने के बाद मैंने होली के रंगों में रंग 

दीवाली के दियो में चमक को कम होते देखा है 

ये दुनिया सेलफोन की है रिश्तों को सिमटे देखा है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Bhupendra kumar jain

Similar hindi poem from Drama