सदैव अटल
सदैव अटल
अटल गुंजाराव गूंज उठी है राष्ट्र कवन में आज
अजात शत्रु अजर अमर है
राष्ट्र धर्म में आज।
पर कवन की भाव भंगियाँ
कर्तव्य पथ पर मौन है,
आओ जन्मदिन मनाएं
अटल अजर अमर का आज।
आज अटल की कर्तव्य गाथा
राष्ट्र का अभिमान है
मां भारती की वेदना का
अटल अजर अमर प्रमाण है।
मां भारती के भाल पर चंद्र जो सजता रहा है,
इतिहास के भालचंद्र का
ये अनुपम बाण है!
"देश को मिटने न दूंगा" मौत से मिटाना पड़े,
राष्ट्रधर्म, राजधर्म कर्तव्य पथ ही मान है,
सत्ता नही चाही जिसने
चाहा प्रजा का अधिकार,
"भारत रत्न" तो एक आदर्श नेतृत्व का ही प्रमाण है,
पोखरण हो या अनुशासन
देशका ,
है विरोध विचारो का देश के शत्रु का
शत्रुभी विश्वा करेते ये अनोखा राज है,
काल के कपाल पर लिखते मिटाते जो गए
वो अटल अजर अमर आज है!
"कदम मिलाकर चलना होगा " ये काहैता जिनका कवन।
ना मांगें ऊंचाई इतनी जो गैर को गले लगा न सकें
रुसवाई भी नहीं इतनी की जो विश्व वेदना के मर्म को पा ना सकें।
वो अटल अमर अजर है।
"समोहम सर्व भूतेषु" का सम्मान मानव मानकाभाव
करुणा का कवन और कवन में करुणा
"यद्ध की पहले में करता नही ,और जीत पर मरता नहीं, सपना टूटे तो निराश होकर बैठता नहीं ।
वो अटल अजर अमर आज है।
जिनकी पत्थर की थी छाती
जिसमे उगता नए समाज का
नया अंकुर,
वो गीत गाए राष्ट्र का और कोई गीत गाता नहीं
वो अटल अमर अजर आज है!
"सुशासन दिन "उत्सव मान्य
आधुनिक बुद्ध का जन्मदिन मनाएं ।
मानवता का दीप जलाएं
देशको मिटते बचाएं !
अटल अजर अमर !
अटल अजर अमर ।
