मधुशिल्पी Shilpi Saxena
Inspirational
रिश्तों को थाम लो
भरकर पैमाना सब्र का
ख़ुशियों का जाम लो
जल्दबाजी में करोगे
कोई तो गलत काम
बेहतर है थोड़ा सा
विराम लो
हिंदी दिवस
मेरा भारत
माँ
मिट्टी का इंस...
देरी
जब सब बदल जाए
कही अनकही
गहराई प्रेम क...
लेखन
मगर जब तलक पहचान बनेगी अपनी तो गुजर जानी है। मगर जब तलक पहचान बनेगी अपनी तो गुजर जानी है।
मन से तो आज भी वही हूँ, बस अपने वजूद से सबका परिचय करवाने लगी हूँ। मन से तो आज भी वही हूँ, बस अपने वजूद से सबका परिचय करवाने लगी हूँ।
ऐसे पुष्प बनो तुम, यह नंदन महक उठे। ऐसे पुष्प बनो तुम, यह नंदन महक उठे।
हम कृतज्ञ है उनके शौर्य और साहस का दिन मान लिखेंगे हम कृतज्ञ है उनके शौर्य और साहस का दिन मान लिखेंगे
लुटा भी हो अगर जीवन, सजाना है नहीं मुश्किल । लुटा भी हो अगर जीवन, सजाना है नहीं मुश्किल ।
तू झुकना न तू चलते रहना चल, चल रे किसान! तू झुकना न तू चलते रहना चल, चल रे किसान!
"गले में फंदा डालकर, पूछेगा जग "बोल, तू ठीक है? "गले में फंदा डालकर, पूछेगा जग "बोल, तू ठीक है?
जिन्हें तुम अपना मानते हो, मुंह वो मोड़ेंगे। बीच रास्ते में अकेला भी, तुम्हें जिन्हें तुम अपना मानते हो, मुंह वो मोड़ेंगे। बीच रास्ते में अकेला भी,...
माना कि, भारतीय संस्कृति में , कन्यादान महादान , कहलाता है। माना कि, भारतीय संस्कृति में , कन्यादान महादान , कहलाता है।
उम्र सारी हम छलकते आंसू छुपाते रहे सह के दर्द औरों की महफ़िल सजाते रहे! उम्र सारी हम छलकते आंसू छुपाते रहे सह के दर्द औरों की महफ़िल सजाते रहे!
अंग्रेजों से लड़कर हमने पाई यह स्वर्णिम आजादी! अंग्रेजों से लड़कर हमने पाई यह स्वर्णिम आजादी!
सबके चेहरों पर खुशी, निराली होगी, सब की, दिवाली सब की होली होगी। सबके चेहरों पर खुशी, निराली होगी, सब की, दिवाली सब की होली होगी।
जिस दर्द और पीड़ा से वो गुजर रही है कौन कहता है ? उसकी हालत सुधर रही है। जिस दर्द और पीड़ा से वो गुजर रही है कौन कहता है ? उसकी हालत सुधर रही है।
सत्कर्म निष्ठा से सदा, वीर खुद को तारते। सत्कर्म निष्ठा से सदा, वीर खुद को तारते।
दो दो माँ पाकर अब तो मैं भी उड़ पाऊंगी आकाश में दो दो माँ पाकर अब तो मैं भी उड़ पाऊंगी आकाश में
मेरे पैरो में मर्यादा की जंजीर सदैव बंधी रही मेरे पैरो में मर्यादा की जंजीर सदैव बंधी रही
गुरु की महिमा है अपरंपार गुरु के बिना सूना है यह संसार। गुरु की महिमा है अपरंपार गुरु के बिना सूना है यह संसार।
काश! वो सीता भी लड़ी होती, देकर न अग्नि परीक्षा, अपनी परीक्षा खुद ली होती! काश! वो सीता भी लड़ी होती, देकर न अग्नि परीक्षा, अपनी परीक्षा खुद ली होती!
एक कड़ी को दूसरी कड़ी से जोड़कर अपनी अनेकता में एकता को बताना है एक कड़ी को दूसरी कड़ी से जोड़कर अपनी अनेकता में एकता को बताना है
अधिकारों की ही मांग की खातिर जिसने अपना आज देश जलाया अधिकारों की ही मांग की खातिर जिसने अपना आज देश जलाया